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Maintenance of Internal Security Act 1971 - (MISA) आंतरिक सुरक्षा
अधिनियम 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के कार्यकाल में संसद
में पारित किया गया था। जिसके तहत किसी भी नागरिक को बिना किसी वारेंट,
बिना न्यायालय परिक्षण के जेल में डाला जा सकता था। बाद में 1977 में
मोरारजी देशाई की सरकार में इसे हटा दिया गया। 25 जून 1975 से 21 मार्च
1977 देश में इंदिरा गांधी द्वारा लोकतंत्र पर वार करते हुए देश में
आपातकाल घोषित करा दिया गया । इस दौर में मीसा कानून में कई बदलाव हुए।
जिससे सरकार के हाथ में असीमित शक्तियां आ गयी। जिसका जमकर दुरउपयोग किया
गया। यह अधिनियम लोकतांत्रिक देश में हुई तानाशाही का एक प्रमाण था। जिसके
अंतर्गत न जाने कितने निर्दोष लोगों को बेरहमी से कारागार में डाल दिया गया
था। मीसा के तहत पुलिस द्वारा गिरफ्तार लोगों को न कोर्ट में पेश करने का कोई
प्रावधान था और न ही जमानत की कोई व्यवस्था । जिस पर भी कांग्रेस विरोधी
विचार रखने का शक गया उसी को जेल में डाल दिया गया। जिसमें कांग्रेस विरोधी
पार्टियों के शीर्ष नेताओं को भी नही बख्शा गया। अटल बिहारी
वाजपेई,जयप्रकाश नारायण, विजयाराजे सिंधिया, राजनारायण, मुरारजी देसाई, चरण
सिंह कृपलानी, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, जार्ज फर्नांडीस,मधु लिमये,ज्योति
बसु,समर गुहा, चंद्रशेखर बालासाहेब देवरस लालकृष्ण आडवानी, चंद्रशेखर, शरद
यादव और लालू प्रसाद को भी सलाखों को पीछे भेज दिया गया। प्रेस को भी
अपने दवाब में ले लिया। प्रेस पर सेंसरसिप लगा दी गयी। सेंसरसिप के खिलाफ जो भी आवाज उठी उसे बल पूर्वक कुचल दिया गया। पुलिस की बर्बरता के
खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार नही था। समकालीन प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला
बॉलीवुड में इंदिरा और केंद्र की प्रसंशा के गीत गाने का दबाव डाला गया।
जानेमाने गायक किशोर कुमार ने जब इसके लिये मना किया तो रेडियो पर उनके
गीतों का प्रसारण बंद करा दिया गया। उन घर पर इनकम टैक्स के छापे डलवाए गये।
जनता ने इस सब का मूक जवाब 1977 के चुनाव में दिया और इंदिरा को बुरी तरह
हार का सामना करना पड़ा। आज भी 25 जून को काला दिवस के रूप में जाना जाता
है।
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